गुरुवार, 30 अगस्त 2018

इंसानियत और धर्म...।।।

जब बात जिस्म और ज़रूरत से ऊपर जाती है,
अक्सर तभी वो एक मुहब्बत कहलाती है...!!!
जब बात चाहत और डर से ऊपर जाती है,
अक्सर तब वो पागलपन कहलाती है...!!!
जब बात मुझसे और तुझसे ऊपर जाती है,
अक्सर तब वो ईश्वर भक्ति कहलाती है...!!!
जब बात तेरी और बस मेरी रह जाती है,
तब वो बस आदत या ज़रूरत कहलाती है...!!!
जब बात तेरी ख्वाहिशों से ऊपर जाती है,
तब वो कुछ खोजने की हसरत कहलाती है...!!!
बेवजह भी तेरी जब कोई मदद कर जाए,
तभी तो वो इंसानियत और धर्म वाली बात कहलाती है।।।

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